राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने आठवीं क्लास की किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' (judicial corruption) से संबंधित एक अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की फटकार के बाद बुधवार को माफी मांगी और कहा कि इस किताब को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा। बता दें कि कोर्ट की फटकार के बाद स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने अपनी वेबसाइट से आठवीं क्लास की इस पुस्तक को हटाने के कुछ घंटों बाद ही पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया है। अब किताब फिर से लिखी जाएगी। बता दें कि इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होने वाली है।
अनजाने में गलती हुई-एनसीईआरटी ने मांगी माफी
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "आठवीं क्लास की पुस्तक के संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है। एनसीईआरटी न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है'। किताब में यह त्रुटि पूरी तरह अनजाने में हुई गलती है। एनसीईआरटी यह पुनः दोहराता है कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थाओं का सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी पर समझ को मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकारक्षेत्र पर प्रश्न उठाने या उसे कमतर करने का कोई इरादा नहीं है।''
दोबारा लिखी जाएगी किताब- एनसीईआरटी
एनसीईआरटी ने कहा, ''अपनी सतत समीक्षा प्रक्रिया के तहत हम रचनात्मक सुझावों का स्वागत करते हैं। इसलिए आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारी से परामर्श के बाद उक्त सामग्री को दोबारा लिखा जाएगा और इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत पर कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।''
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, लगाई थी फटकार
सु्प्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में की गई "आपत्तिजनक" टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया। यह कदम वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष उल्लेख किए जाने के बाद उठाया गया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
(इनपुट-पीटीआई)
संपादक की पसंद